कौन केस कर सकता है
आप केस कर सकते हैं अगर:
- आपका धंधा Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ है (MSMED एक्ट की धारा 2(n) में इसे “सप्लायर” कहा गया है); और
- किसी खरीदार पर आपके दिए माल या सर्विस का पैसा बाकी है।
खरीदार कोई भी हो सकता है जिसने आपसे ख़रीदा: कंपनी, दुकान, सरकारी विभाग या सरकारी कंपनी (PSU)। धारा 18(4) के तहत आपके इलाके की काउंसिल भारत में कहीं के भी खरीदार के ख़िलाफ़ केस सुन सकती है।
ये इस रास्ते से केस नहीं कर सकते:
- मीडियम एंटरप्राइज़. एक्ट का लेट पेमेंट वाला चैप्टर सिर्फ़ माइक्रो और स्मॉल पर लागू होता है।
- होलसेल और रिटेल ट्रेडर. ट्रेडर Udyam पर रजिस्टर हो सकते हैं, पर MSME मंत्रालय ने साफ़ किया है कि उन्हें इससे सिर्फ़ प्रायोरिटी सेक्टर लोन का फ़ायदा मिलता है; एक्ट के लेट पेमेंट वाले प्रावधान उन पर लागू नहीं होते (1 सितंबर 2021 का ऑफ़िस मेमोरेंडम)।
माल भेजने से पहले रजिस्टर कीजिए। सिल्पी इंडस्ट्रीज़ (2021) केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक्ट का फ़ायदा लेने के लिए विक्रेता का कॉन्ट्रैक्ट की तारीख पर रजिस्टर्ड होना ज़रूरी है। इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले की सप्लाई के बिल शायद इसमें न आएं। आपके बिल पुराने हैं तो केस से पहले वकील से पूछ लीजिए।
लेट पेमेंट किसे माना जाता है
एक्ट की धारा 15 आख़िरी तारीख तय करती है:
- पेमेंट के दिनों पर लिखित समझौता हो: तय तारीख, पर माल या सर्विस स्वीकार करने के 45 दिन से ज़्यादा कभी नहीं।
- लिखित समझौता न हो: स्वीकार करने के 15 दिन के अंदर।
आम तौर पर स्वीकार करने का दिन वही है जिस दिन माल पहुंचा या सर्विस दी गई। अगर खरीदार डिलीवरी के 15 दिन के अंदर लिखित में आपत्ति करे, तो वह दिन गिना जाता है जिस दिन आपने आपत्ति दूर की। आख़िरी तारीख के बाद का पेमेंट लेट है, और अगले दिन से ब्याज चलता है। किसी बिल की तारीख 45 दिन नियम चेकर पर जांचिए।
केस कहां करें
MSME मंत्रालय ने जून 2025 में MSME ODR पोर्टल शुरू किया। 15 अक्टूबर 2025 से लेट पेमेंट के नए केस वहीं दर्ज होते हैं। पुराना MSME समाधान पोर्टल अब नई अर्ज़ी नहीं लेता और आपको ODR पोर्टल पर भेजता है; उस तारीख से पहले समाधान पर दर्ज केस जारी रहते हैं, और उन्हें ODR पोर्टल पर ले जाया जा रहा है।
मंत्रालय इसे कम ख़र्च वाला रास्ता बताता है। केस करते समय पोर्टल पर कोई फ़ीस हो तो देख लीजिए।
कौन-से कागज़ तैयार रखें
- हर बाकी बिल, उसकी तारीख और रकम के साथ;
- परचेज़ ऑर्डर या लिखित समझौता, ख़ासकर अगर उसमें पेमेंट के दिन लिखे हों;
- डिलीवरी का सबूत: साइन किए चालान, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट की रसीद, या सर्विस के लिए खरीदार की मंज़ूरी;
- आपका Udyam रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट;
- पार्टी का लेजर (खाते का स्टेटमेंट), पेमेंट और क्रेडिट नोट के साथ;
- आपके रिमाइंडर और खरीदार के जवाब, कन्फ़र्म किया गया बैलेंस भी;
- खरीदार का पूरा नाम, पता और GST नंबर।
केस कैसे आगे बढ़ता है
- ऑनलाइन बातचीत. केस काउंसिल तक पहुंचने से पहले पोर्टल आपको और खरीदार को सीधे सुलझाने का मौका देता है।
- सुलह (conciliation). बात न बने तो आपके इलाके की माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज़ेज़ फ़ैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) ख़ुद या किसी विवाद-समाधान केंद्र के ज़रिए दोनों पक्षों में समझौता कराने की कोशिश करती है (धारा 18(2))।
- आर्बिट्रेशन. सुलह न हो तो काउंसिल ख़ुद आर्बिट्रेशन करती है या केस किसी आर्बिट्रेशन केंद्र को भेजती है, जो फ़ैसला देता है (धारा 18(3))। दोनों चरण पोर्टल पर ऑनलाइन चल सकते हैं।
- 90 दिन का लक्ष्य. एक्ट कहता है कि हर केस दर्ज होने के 90 दिन के अंदर तय होना चाहिए (धारा 18(5))। इसे क़ानून का लक्ष्य मानिए, पक्का वादा नहीं।
अगर खरीदार काउंसिल के फ़ैसले को कोर्ट में रद्द करवाना चाहे, तो उसे पहले फ़ैसले की रकम का 75% जमा करना होता है (धारा 19)।
कितना ब्याज मांग सकते हैं
धारा 16 के तहत देर से पेमेंट करने वाला खरीदार आख़िरी तारीख के अगले दिन से, RBI के बैंक रेट के तीन गुना पर, हर महीने जुड़ने वाला चक्रवृद्धि ब्याज देता है, चाहे आपके समझौते में कुछ भी लिखा हो। धारा 17 के तहत खरीदार को मूल रकम और यह ब्याज, दोनों देने हैं।
हर बिल का ब्याज MSME ब्याज कैलकुलेटर पर निकालिए, और उसका हिसाब अपने केस के साथ रखिए।
2026 में पास हुए बदलाव
संसद ने अगस्त 2026 में MSMED (संशोधन) बिल पास किया। दूसरे बदलावों के साथ इसमें हर चरण की समय सीमा है: मीडिएशन के लिए 90 दिन, नाकाम मीडिएशन को आर्बिट्रेशन में भेजने के लिए 30 दिन, और दलीलें पूरी होने के बाद फ़ैसले के लिए 90 दिन। ये बदलाव उन तारीख़ों से लागू होंगे जो केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी, इसलिए केस करते समय ODR पोर्टल पर देख लीजिए कि कौन-से कदम लागू हैं।
केस से पहले पार्टी पेमेंट न दे तो क्या करें वाले आसान कदम आज़माइए: उनमें ख़र्च कम है और रिश्ते पर बोझ भी कम।