पार्टी पेमेंट न दे तो क्या करें? एक-एक कदम का तरीका

पहले बिल जांचिए, फिर साफ़ रिमाइंडर भेजिए, सही समय पर फ़ोन कीजिए और बकाया रकम लिखित में कन्फ़र्म करवाइए। पुराना पैसा आने तक नई उधारी रोकिए। अगर आप Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं, तो MSMED एक्ट लेट पेमेंट पर ब्याज और वसूली का ऑनलाइन रास्ता देता है।

BusyCounter हर बिल पर सही दिन रिमाइंडर भेजता है और बताता है कि किसने पैसे दिए।

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पहले अपना बिल जांचिए

जिस पार्टी को लगता है कि बिल में गड़बड़ है, वह पेमेंट नहीं करेगी, सही बिल का इंतज़ार करेगी। रिमाइंडर भेजने से पहले देख लीजिए:

  • रेट और मात्रा ऑर्डर या PO से मिलते हैं;
  • पूरा माल पहुंचा है, और साइन किया हुआ चालान या डिलीवरी का कोई सबूत आपके पास है;
  • बिल पर PO नंबर, GST डिटेल और आपकी बैंक डिटेल सही हैं;
  • जो डिस्काउंट या क्रेडिट नोट तय हुआ था, वह लग चुका है।

कुछ गलत है तो पहले सही बिल भेजिए, फिर याद दिलाइए।

साफ़ रिमाइंडर भेजिए

अच्छा रिमाइंडर वह है जिसे पढ़कर पार्टी को आपसे कुछ पूछना न पड़े: बिल नंबर, रकम, ड्यू डेट और पेमेंट का तरीका, सब एक छोटे मैसेज में। पहला मैसेज नरमी से भेजिए। हो सकता है बिल अभी किसी की टेबल पर ही पड़ा हो।

हर स्टेज के लिए तैयार मैसेज हमारे पेमेंट रिमाइंडर मैसेज पेज पर हैं, और WhatsApp रिमाइंडर जनरेटर उनमें आपकी पार्टी की डिटेल भर देता है। हर रिमाइंडर में क्या-क्या होना चाहिए, यह पेमेंट रिमाइंडर कैसे लिखें में है।

सही समय पर फ़ोन कीजिए

दो-तीन रिमाइंडर के बाद भी जवाब न आए तो फ़ोन कीजिए। कामकाजी दिन में, काम के घंटों में कॉल कीजिए; सुबह बहुत जल्दी, देर रात, या छुट्टी और त्योहार के दिन नहीं।

कॉल पर:

  • पूछिए कि बिल मिला या नहीं, और उसमें कोई दिक्कत तो नहीं;
  • “जल्दी कर देंगे” की जगह तारीख मांगिए: “शुक्रवार 14 तारीख तक हो जाएगा?”;
  • कॉल के बाद एक छोटा मैसेज भेजकर जो तय हुआ, वह लिख दीजिए।

सामने वाला गरम हो जाए, तब भी आप शांत रहिए। आपको पैसा भी चाहिए, और ज़्यादातर बार पार्टी भी।

बकाया रकम लिखित में कन्फ़र्म करवाइए

रकम पर बहस सबसे देर से सुलझती है। पार्टी को उनका लेजर (खाते का स्टेटमेंट) भेजिए, जिसमें हर बाकी बिल, हर पेमेंट और हर क्रेडिट नोट हो, और क्लोज़िंग बैलेंस लिखित में कन्फ़र्म करने को कहिए: लेटरहेड पर, ईमेल से या WhatsApp पर जवाब देकर। कन्फ़र्म बैलेंस से “हमारे हिसाब में रकम अलग है” वाली बात ख़त्म हो जाती है, और कभी केस करना पड़े तो यह काम का सबूत है।

नई उधारी रोकिए

पुराने बिल बाकी हों और पार्टी नया माल उठाती रहे, तो आपका जोखिम बढ़ता जाता है। विनम्रता से बता दीजिए कि पुराने बिल क्लियर होने तक नए ऑर्डर एडवांस या कैश ऑन डिलीवरी पर होंगे, या एक सीमा तय कर दीजिए कि एक समय में कितनी उधारी चलेगी। इसे सज़ा की तरह नहीं, धंधे के नियम की तरह कहिए।

अगर आप Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं

माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज़ेज़ डेवलपमेंट एक्ट, 2006 (MSMED एक्ट) का चैप्टर V उन सप्लायरों की रक्षा करता है जो Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं:

  • समय सीमा (धारा 15). खरीदार को लिखित में तय तारीख तक पेमेंट करना है, और वह तारीख माल या सर्विस स्वीकार करने के ज़्यादा से ज़्यादा 45 दिन बाद की हो सकती है। लिखित समझौता न हो, तो 15 दिन के अंदर।
  • ब्याज (धारा 16 और 17). देर से पेमेंट करने वाले खरीदार को समय सीमा ख़त्म होने के अगले दिन से, RBI के बैंक रेट के तीन गुना पर, हर महीने जुड़ने वाला चक्रवृद्धि ब्याज देना होता है। कोई समझौता यह हक़ नहीं छीन सकता।

किसी बिल की आख़िरी तारीख 45 दिन नियम चेकर से निकालिए, और अब तक का ब्याज MSME ब्याज कैलकुलेटर पर देखिए।

लेट पेमेंट का असर खरीदार के टैक्स पर भी पड़ता है: वह यह ख़र्च सिर्फ़ उसी साल में दिखा सकता है जिस साल असल में पेमेंट करे। पूरी बात और इसे विनम्रता से कैसे बताएं, यह हमारी 43B(h) गाइड में है।

MSME ODR पोर्टल पर केस कीजिए

रिमाइंडर, फ़ोन और लिखित बैलेंस के बाद भी पैसा न आए, तो Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल सप्लायर MSME मंत्रालय के MSME ODR पोर्टल पर ऑनलाइन केस कर सकता है। शुरुआत खरीदार के साथ ऑनलाइन बातचीत से होती है। बात न बने तो केस आपके इलाके की माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइज़ेज़ फ़ैसिलिटेशन काउंसिल के पास जाता है, जो पहले सुलह (conciliation) की कोशिश करती है और फिर भी न सुलझे तो आर्बिट्रेशन से फ़ैसला करती है।

कौन केस कर सकता है, क्या तैयार रखना है और केस कैसे आगे बढ़ता है, यह हमारी MSME पेमेंट शिकायत गाइड में है।

आख़िरी कदम: वकील का नोटिस

कुछ सप्लायर बाकी रास्ते आज़माने के बाद, कोर्ट जाने से पहले, वकील के ज़रिए लीगल नोटिस भेजते हैं। नोटिस में बकाया रकम लिखी होती है और एक तारीख तक पेमेंट मांगा जाता है। यह औपचारिक कदम है, इसका ख़र्च है और रिश्ते पर असर भी पड़ता है, इसलिए वकील से पूछिए कि आपके मामले में यह ठीक है या नहीं, और उसमें क्या लिखा जाए। ख़ुद से लीगल नोटिस जैसा दिखने वाला मैसेज मत भेजिए।

02 अक्टू॰ 2026 को जांचा गया। यह एक गाइड है, क़ानूनी या टैक्स सलाह नहीं।

स्रोत

40 बिलों के लिए यही करना पड़ता है?

BusyCounter हर बिल पर सही दिन रिमाइंडर भेजता है और बताता है कि किसने पैसे दिए।

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